घोटाले हरियाणा

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और उनके चहेते मंत्री मनीष ग्रोवर दोनों बेनकाब

ईमानदारी का ढ़ोंग करके 150 करोड़ डकारे

रोहतक में 150 करोड़ की बेशकीमती सरकारी जमीन कोड़ियों में बेच खाई

चहेती कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए उड़ाई गईं नियमों की सरेआम धज्जियां

दिवालिया घोषित कंपनी को 40 करोड़ की भारी रिश्वत लेकर दे दिया गया लूटखसोट का लायसैंस

सर्वदमन सांगवान
विनीत कुमार गर्ग, अमितेष कुमार (कैमरामैन)
रोहतक । बीजेपी की हरियाणा सरकार का लगभग डेढ़ सौ करोड़ रूपये का एक बड़ा घोटाला सामने आया है । इस घोटाले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तथा उनके एक चहेते मंत्री मनीष ग्रोवर की सीधी भूमिका होने के सबूत है । मनीष ग्रोवर रोहतक शहर विधान सभा सीट से विधायक हैं और खट्टर सरकार में सहकारिता तथा कुछ और महकमों के मंत्री हैं ।

सबूत हैं कि रोहतक शहर के बीचोंबीच प्राइम लोकेशन पर स्थित 1300 वर्ग गज का एक बेशकीमती सरकारी भूखंड कोड़ियों के भाव में बीजेपी सरकार की एक चहेती कंपनी के हवाले कर दिया गया । इस कंपनी को यह भूखंड बेचे जाने के आदेश पर खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हस्ताक्षर किये हुए हैं । आरोप हैं कि मुख्यमंत्री को हस्ताक्षर के लिए राजी करने में मनीष ग्रोवर की अहम भूमिका है । चर्चा यह है कि जिस ऋचा कृष्णा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को यह जमीन दी गई है , उसके लिए खुद बीजेपी के महामहिम और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सिफारिस की थी ।

गौरतलब है कि रोहतक में भिवानी स्टैंड पर ऐतिहासिक दुर्गा भवन मंदिर के सामने स्थित इस भूखंड पर पहले मल्टी लैवल पार्किंग बनाने की योजना थी , ताकि रोहतक के ‘क्नाट-प्लेस’ कहे जाने वाले ‘किला रोड़ बाजार’ और रेलवे रोड़ मार्किट की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके । रोहतक के बाशिंदे जानते हैं कि पहले यहां पर सिटी पुलिस स्टेशन होता था , जिसे वर्षों पहले यहां से शिफ्ट कर के पुराने बस अड्डे की खाली जगह में ले जाया जा चुका है । यदि इस स्थान पर मल्टी स्टोरी पार्किंग बन गई होती तो इस इलाके में पार्किंग को लेकर एक बड़ी समस्या हल हो सकती थी , लेकिन बीजेपी के स्थानीय विधायक मनीष ग्रोवर की शुरू से ही इस भूखंड पर नजर थी । वैसे यह भूखंड रोहतक नगर निगम की संपत्ति है । नगर निगम पर दबाव बना कर इस भूखंड को पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के जरिये बहुस्तरीय पार्किंग कम कमर्शियल कांप्लैक्स बनाने के लिए मजबूर किया गया ।

इस मामले में सारा खेल बहुत ही शातिराना तरीके से खेला गया तथा बेशर्मी से नियम कायदों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं ।

इस भूखंड को फरीदाबाद की ‘ऋचा कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी’ को मल्टी लैवल पार्किंग व कामर्शियल कांप्लैक्स बनाने के लिए 99 सील की लीज पर दिया गया है । कंपनी को यह जमीन मात्र दो करोड़ 70 लाख रूपये के अपफ्रंट प्रीमियम के साथ सालाना दो लाख 24 हजार 112 रूपये के सालाना किराये पर 99 साल के लिए लीज पर दी गई है । यह लीज एक रूपया प्रति स्क्वायर मीटर के हिसाब से होगी ।

आप यह जान कर हैरान रह जाएंगे कि 997 स्कवायर मीटर यानि कुल 1300 वर्ग गज भूमि पर बनने वाले इस प्रस्तावित प्रोजैक्ट में बेसमैंट व ग्राऊंड फ्लोर के अलावा कुल चार मंजिलें होंगी । इनमें से बेसमेंट , ग्राऊंड फ्लोर व पहली मंजिल पर व्यावसायिक दुकानें व शो रूम होंगे तथा बाकी की मंजिलों पर पार्किंग की व्यवस्था होगी । सबसे ऊपर की मंजिल पर विशाल व शानदार कैफेटेरिया बनाया जाएगा ।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस सारे प्रोजैक्ट पर तकरीबन 17 करोड़ रूपये का खर्चा होने का अनुमान है । यानि निर्माण पर 17 करोड़ तथा अप फ्रंट चार्जिज 2.70 करोड़ रूपये समेत कुल 19 करोड़ 70 लाख रूयये खर्च करके कंपनी को तकरीबन 150 करोड़ का धंधा करने की छूट दे दी गई है । बदले में निगम को सिर्फ 2 करोड़ 70 लाख रूपये एक मुश्त मिलेंगे जबकि सालाना सवा दो लाख रूपये का किराया मिलेगा जो कि ऊंट के मुंह में जीरे से ज्यादा नहीं है । यदि किसी को महज 20 करोड़ रूपये खर्च करके 130 से 140 करोड़ रूपये जेब में डालने का मौका मिल जाए भला कौन ऐसा मूर्ख होगा जो इस मौके को हाथ से जाने देगा ?

इस भूखंड वाले एरिया में जमीनों का भाव सुन कर आप के पैरों तले से जमीन खिसक जाएगी । साथ लगती शौरी मार्किट और आसपास के इलाकों में 14 लाख रूपये प्रति वर्ग गज का बाजार भाव है । इस हिसाब से यह जमीन 150 करोड़ रूपये से भी अधिक कीमत की है , जबकि इसे मात्र दो करोड़ 70 लाख रूपये में ऋचा कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी को पूरे 99 साल के लिए सौंप दिया गया है ।

भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार ऋचा कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी के एजेंट इस कांप्लैक्स में बन रही दुकानों के सौदे 12 से 14 लाख रूपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से कर रहे हैं यानि कंपनी को एक झटके में सीधे 130 से 140 करोड़ का लाभ मिलने का बंदोबस्त कर दिया गया है ।

सबसे ताज्जुक की बात यह है कि नगर निगम के अधिकारियों ने बाजार भाव के विपरीत मात्र 70 हजार रूपये प्रति गज की दर से जमीन के भाव की एसेसमैंट की है जो कि जनता के साथ एक भद्दा मजाक ही कहा जा सकता है ।

यह तो हुई घोटाले की बात , अब सरकार की भूमिका पर भी थोड़ी नजर डाल लीजिए । इस घोटाले को अंजाम देने और लोगों की आंखों में धूल झौंकने के लिए तीन संदिग्ध कंपनियों – रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी (15/09/1993 को निगमित) , ऋचा कृष्णा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी (01/01/2019 को निगमित) तथा आईएनडी सैनेटरी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड (10/10/2016 को निगमित) का सहारा लिया गया ।

इस भूखंड को पब्लिक प्रइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के जरिए ल़ीज पर देने के लिए जो निविदा आमंत्रित की गईं थी , उसमें भाग लेने वाली कंपनियों के लिए सरकार ने कुछ नियम तय किये थे । एक नियम यह था कि निविदा में भाग लेने वाली कंपनी 31 मार्च 2018 तक कम से कम पांच वर्ष पुरानी हो । इस नियम पर निविदा में भाग लेने वाली तीन कंपनियों में से सिर्फ रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी ही खरी उतरती थी , जिसका निगमन 15/09/1993 को हुआ था । शेष दो कंपनियों में से ऋचा कृष्णा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का तो निगमन ही पहली जनवरी 2019 को हुआ है यानि कंपनी को बने हुए ही मात्र 9 महीने हुए हैं । निविदा में भाग लेने वाली दूसरी कंपनी आईएनडी सैनेटरी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड का निगमन भी 10/10/2016 को हुआ है यानि 31 मार्च 2018 को इस कंपनी को अस्तित्व में आये महज डेढ़ साल ही हुआ था । इस तरह ये दोनों कंपनियां निविदा में भाग लेने के योग्य नहीं थीं और निविदा की पहली शर्त पर ही खरी नहीं उतरतीं थीं । फिर भी इन्हें निविदा में भाग लेने की इजाजत किसके कहने पर दी गई या किसके दबाव में इन्हें निविदा में शामिल किया गया , यह गंभीर जांच का विषय है ।

निविदा की एक प्रमुख शर्त यह भी थी कि निविदा में हिस्सा लेने वाली कंपनी की माली हालत बेहतरीन हो यानि वही कंपनी निविदा में भाग लेने के लिए पात्र मानी जाएगी , जिसका पिछले पांच साल का टर्नओवर कम से कम 20 करोड़ रूपये का होगा । इसके अलावा 31 मार्च 2018 तक पांच करोड़ रूपये की नेट वर्थ (कुल पूंजी) वाली कंपनी को ही बोली देने की इजाजत देने की शर्त भी जोड़ी गई थी ।

लेकिन इन दोनों शर्तों की भी निविदा प्रक्रिया में सरेआम धज्जियां उड़ा दी गईं । मजेदार तथ्य यह है कि पांच साल पुरानी कंपनी होने की शर्त पूरी करने वाली इकलौती कंपनी रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी निविदा प्रक्रिया में भाग लेते समय दिवालिया घोषित हो चुकी थी और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की चंडीगढ़ बैंच के न्यायाधीश श्री आरपी नागरथ ने इस कंपनी के निदेशकों की सभी शक्तियों पर ब्रेक लगाकर श्री अरविंद कुमार को एनसीएलटी की तरफ से प्रतिनिधि बना दिया था । मतलब यह कि इस कंपनी के मालिकान नियमानुसार रोहतक के भूखंड की निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र नहीं थे । लेकिन हरियाणा सरकार ने इस तथ्य की जानते बूझते हुए भी अनदेखी की और इस कंपनी के दिवालिया मालिकान को निविदा प्रक्रिया में भाग लेने दिया । हैरानी की बात यह है कि रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी के मालिकों ने नियमों के विरूद्ध जाकर आननफानन में पहली जनवरी 2019 को ऋचा कृष्णा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम से एक नई कंपनी खड़ी की और उसके डायरेक्टर्स की हैसियत से निविदा में भाग लिया , जबकि देश के कानून के मुताबिक दिवालिया घोषित होने वाली कंपनी के डायरेक्टर्स को न तो किसी निविदा में भाग लेने की पॉवर होती है तथा न ही नई कंपनी बनाने का अधिकार रहता है ।

आप के चौंकने की एक और बात यह है कि रोहतक नगर निगम ने इस भूखंड के संबंध में सबसे पहले 20 दिसंबर 2018 को ई-टैंडर खोला था जिसमें सिर्फ एक ही टैंडर आया होने के कारण टैंडर रद्द करना पड़ गया था । निगम ने आननफानन में 2 जनवरी 2019 को फिर से अपनी वैबसाइट पर टैंडर अपलोड किया और 28 जनवरी को तकनीकी रिपोर्ट के साथ इस टैंडर को खोल दिया । इस बार तीन निविदाएं आई । पहली जनवरी 2019 को बनी कंपनी ‘ऋचा कृष्णा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ को यह टैंडर दे दिया गया । यानि टैंडर आमंत्रित करने से महज एक दिन पहले अस्तित्व में आई कंपनी को यह टैंडर दे दिया गया । न तो पांच वर्ष पुरानी कंपनी होने की शर्त का पालन किया गया , न बीस करोड़ रूपये के सालाना टर्नओवर को देखा गया तथा न ही पांच करोड़ रूपये की नैट वर्थ की शर्त पर ही कोई विचार किया गया ।

आप समझ सकते हैं कि ऋचा कृष्णा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को निगमित कराने का मौका देने के लिए ही नगर निगम ने प्रथम ई-टैंडर को रद्द किया और इस कंपनी के निगमित होने के अगले ही दिन फिर से ई-टैंडर आमत्रित कर लिया ।

यह भी साफ है कि सिर्फ खानापूर्ति के लिए ही तीन ऐसी कंपनियों को निविदा में भाग लेने दिया गया जो कि निविदा की प्रमुख शर्तों पर खरी नहीं उतरती थीं । इन कंपनियों का परस्पर संबंध भी जगजाहिर है और जांच पड़ताल से यह भी उजागर हो सकता है कि इनके मालिकान ने पूल करके यानि मिलीभगत करके रेट भरे थे । लेकिन रोहतक नगर निगम के अधिकारियों , स्थानीय निकाय विभाग की मंत्री कविता जैन और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी अपनी आंखे और दिमाग के कपाट बंद रखे ,जिनके सामने से इस मामले की फाइल अंतिम अनुमोदन के लिए गुजरी थी । इन सभी के इस फाइल पर हस्ताक्षर हैं ।

रोहतक के पूर्व विधायक भारत भूषण बत्रा का कहना है कि इस मामले में ऋचा कृष्णा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मालिकों को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए तमाम नियम कायदों को ताक पर रख दिया गया । उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में टेबल के नीचे से कम से कम 40 करोड़ रूपये की घूस खाई गई है जो कि रोहतक के एक नेता से लेकर दो मंत्रियों व मुख्यमंत्री तक में बंटी है । उन्होंने सारे मामले की हाई कोर्ट के सीटिंग जज ले जांच कराये जाने की मांग भी की ।

जब हमारी टीम ने इस बारे में रोहतक नगर निगम के अधिकारियों से उनका वर्जन जानने के लिए बात की तो वे बात करने की बचाए कतरा कर भाग खड़े हुए । मंत्री मनीष ग्रोवर से भी बात करने और उनका पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई , लेकिन वे बात करने को तैयार नहीं हुए ।

कुल मिला कर कहा जा सकता है कि मनोहर लाल खट्टर सरकार के ईमानदारी और पारदर्शिता के दावे महज जुमले हैं । सारे मामले में कुछ लोगों के तो वारे न्यारे हो गये , लेकिन रोहतक की जनता को सिर्फ ठेंगा मिला है । रोहतक वासियों को सिर्फ 65 कार और 250 दुपहिया वाहन पार्क करने की सुविधा से ही संतोष करना होगा । “हमाम में सब नंगे हैं”, इस मुहावरे पर बीजेपी की हरियाणा सरकार भी पूरी तरह खरी उतरती है ।

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