राजनीति

हरियाणा में त्रिशंकु विधान सभा गठित होने के आसार, सर्वे के मुताबिक किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं

कांग्रेस के ग्राफ में अचानक उफान से बीजेपी के रणनीतिकार हैरान

जेजेपी के मैदान में होने से कांग्रेस को घाटा , बीजेपी फायदे में

अन्य दल नहीं छू पाएंगे दहाई का आंकड़ा

खट्टर सरकार के आधा दर्जन मंत्री गंभीर संकट में , हो सकते हैं धराशायी

सर्वदमन सांगवान
@ 9812024027
रोहतक । हरियाणा विधान सभा के चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है । प्रदेश के 50 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में गहरा सर्वे करने के बाद यह तथ्य उभर कर आया है कि हरियाणा में चुनाव परिणाम काफी चौंकाने वाले होंगे ।

सर्वे के मुताबिक हरियाणा में त्रिशंकु विधान सभा गठित होने के पूरे आसार हैं । चुनाव परिणाम सत्तारूढ़ बीजेपी को गहरा झटका दे सकते हैं जोकि राज्य की नब्बे में से 75 सीटें जीतने के ख्वाब देख रही है और लगातार दावे कर रही है । बीजेपी ने पिछले कई महीने से अपनी टैगलाइन बना रखी है ‘अब की बार मनोहर सरकार , हरियाणा में बीजेपी पचहत्तर सीट पार’ । लेकिन सर्वे के मुताबिक बीजेपी हरियाणा में 35 सीट के पार भी शायद नहीं जा पाएगी ।

ताजातरीन सर्वे के अनुसार पिछले पांच वर्ष से मरणासन्न हालत में वैंटीलेटर पर पड़ी हरियाणा कांग्रेस के ग्राफ में एकाएक आश्चर्यजनक बढ़ोतरी दिखाई दे रही है । जब से कांग्रेस आलाकमान ने अपने प्रदेशाध्यक्ष डा. अशोक तंवर को हटा कर पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा और पूर्व मुख्य मंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को राज्य की कमान सौंपी है , तब से हरियाणा कांग्रेस में नई जान पड़ गई है और कांग्रेस दिन प्रतिदिन बीजेपी के मुकाबले में आती जा रही है ।

कांग्रेस के ग्राफ में एकाएक आश्चर्यजनक उठान को देखते हुए बीजेपी आलाकमान के भी हाथ पांव फूल गये हैं और पार्टी ने हरियाणा के अपने गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत झौंक दी है ।

सर्वे में कहा गया है कि बीजेपी राज्य में सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आ सकती है । उधर कांग्रेस भी 32-33 सीटें जीत कर बीजेपी के मंसूबों पर पानी फिराती हुई नजर आ रही है । जेजेपी भी 7 से 10 सीटें जीत कर मुकाबले को रोचक मोड़ दे सकती है । यदि जेजेपी इतनी तादाद में सीटें अपने खाते में दर्ज करने में सफल रहती है तो चुनावों के बाद वह ‘किंग मेकर’ की भूमिका में आ सकती है यानि जेजेपी की अनदेखी कर कोई भी पार्टी सत्ता की सीढ़ी नहीं चढ़ पाएगी । निष्पक्ष पर्यवेक्षक मानते हैं कि जेजेपी का ग्राफ बढ़ने से कांग्रेस की संभावनाओं पर तुषारापात हो सकता है और इससे बीजेपी को सीधा फायदा मिलेगा । गंभीर संकट से जूझ रहे इंडियन नेशनल लोकदल को भी पांच सीट मिलने के आसार हैं । इनमें दो सिरसा जिले में , तथा एक-एक कैथल , पलवल व नूंह जिले की सीटें हो सकती हैं । अन्य दलों व निर्दलीयों के खाते में भी चारपांच सीटें जाती दिख रही हैं ।

काग्रेस को रोहतक , झज्जर , सोनीपत , भिवानी व दादरी आदि जिलों की 21 में से 15 सीटों पर सफलता मिलती लग रही है जबकि उत्तर हरियाणा के आधा दर्जन जिलों में बीजेपी का पलड़ा भारी रहेगा और वहां की ज्यादातर सीटें बीजेपी के खाते में जाएगीं । दक्षिण हरियाणा की सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला कांटे का रहेगा । अहीरवाल में दोनों दल थोड़ा बहुत ही उपर नीचे रहेंगे । सिरसा , हिसार व जींद में जेजेपी और कांग्रेस का पलड़ा भारी रहेगा , जबकि बीजेपी को इन जिलों में तगड़ा झटका लग सकता है । फरीदाबाद , पलवल व नूंह की सीटों के परिणाम निर्णायक सिद्ध हो सकते हैं । इन जिलों की पंद्रह सीटों का परिणाम ही हरियाणा में सत्ता की चाबी का फैसला करेंगी ।

इस बीच , खबरें आ रही हैं कि मनोहर लाल खट्टर सरकार के आधा दर्जन मंत्री जनविरोध के चलते चुनावी अखाड़े में चित्त हो सकते हैं । इन मंत्रियों में राज्य के शिक्षा मंत्री रामबिसास शर्मा (अटेली) , वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु (नारनौंद) , समाज कल्याण व स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन (सोनीपत शहर), कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ (बादली) और सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर (रोहतक) शामिल हैं । ये सभी मंत्री गहरे संकट में हैं और इनके चुनाव जीतने की संभावनाएं बहुत ही क्षीण हैं । बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला भी मुश्किल मुकाबले में फंसे हुए बताए जाते हैं ।

देखना दिलचस्प होगा कि हरियाणा की सियायत का ऊंट किस करवट बैठेगा और प्रदेश की जनता मतदान करते समय किस किस को दुत्कारती है और किसे सिर आंखों पर बैठा कर सत्ता की बागडौर सौंपती है । वैसे जिस तरह से बीजेपी के तमाम दिग्गज हरियाणा की धरती की खाक छानते फिर रहे हैं , उससे तो लगता है कि बीजेपी के लिए मामला इतना आसान नहीं है जितना मीडिया में प्रचारित किया जा रहा है ।

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