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मनीष ग्रोवर के मामले में गेंद अब चुनाव आयोग के पाले में, ग्रोवर का नामांकन रद्द होने की संभावना अभी खत्म नहीं

ग्रोवर का नामांकन बचाने के लिए निर्वाचन अधिकारी पर चौतरफा दबाव

शैक्षणिक योग्यता में कथित फर्जीवाड़े व अन्य खामियों को लेकर ग्रोवर का नामांकन रद्द करने की मांग

सर्वदमन सांगवान
रोहतक । हरियाणा के सहकारिता मंत्री तथा बीजेपी के रोहतक सीट के प्रत्याशी मनीष ग्रोवर का नामांकन पत्र रद्द किये जाने के सिलसिले में गेंद अब चुनाव आयोग के पाले में चली गई है । इस मामले में चुनाव आयोग के पीठासीन अधिकारी ने शिकायतकर्ता एडवोकेट नवीन सिंघल और मनीष ग्रोवर के वकीलों की जिरह सुनने के बाद मामला राज्य चुनाव आयोग को भेज दिया है और अब इस मामले में राज्य चुनाव आयोग के फैसले का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है ।

कानूनी विशेषज्ञों की राय के मुताबिक मनीष ग्रोवर पर चुनाव आयोग को गुमराह करने के बहुत ही गंभीर आरोप हैं और उनके विरूद्ध काफी पुख्ता सबूत पेश किये गये हैं । यदि चुनाव आयोग ने निष्पक्ष हो कर इन आरोपों व सबूतों पर विचार किया तो मनीष ग्रोवर मुश्किल में फंस सकते हैं । ऐसी स्थिति में उनका नामांकन पत्र रद्द किया जा सकता है । यदि ऐसा हुआ तो यह मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार के लिए यह तगड़ा झटका देने वाला फैसला होगा ।

वैसे राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हरियाणा सरकार इस मामले में अपने सिपहसालार मनीष ग्रोवर पर कोई आंच नहीं आने देगी और उन्हें बचाने के लिए हर मुमकिन कदम उठाएगी । एक प्रमुख राजनीतिक दल के नेता का कहना है कि चुनाव आयोग किसी भी सूरत में बीजेपी सरकार के हितों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएगा । वैसे भी चुनाव आयोग की साख बची ही कहां है ?

गौरतलब है कि रोहतक के एक वकील नवीन सिंघल ने रोहतक विधान सभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर को पत्र लिख कर शिकायत की थी कि मंत्री मनीष ग्रोवर ने अपने नामांकन फार्म में कई महत्वपूर्ण जानकारियां जानबूझकर छिपाई हैं ताकि वे मतदाताओं को गुमराह करके चुनावी फायदा ले सकें ।

शिकायत में कहा गया है कि मनीष ग्रोवर ने नामांकन पत्र के फार्म- 26 में झूठा शपथपत्र दिया है कि उनका नाम मनीष ग्रोवर पुत्र वजीर चंद है जबकि उनके शैक्षणिक रिकार्ड में उनका नाम मुंशी राम पुत्र वजीर चंद है । खास बात यह है कि देश की किसी भी कोर्ट ने उन्हें अपना नाम बदलने की अनुमति प्रदान नहीं की है । सिर्फ किसी के कहने मात्र से नाम बदलने की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जा सकती । इसके लिए नियमानुसार अदालत से अनुमति लेना अनिवार्य होता है ।

मनीष ग्रोवर ने फॉर्म-26 में एक और झूठा शपथपत्र दिया है कि वे हायर सैकंडरी परीक्षा उत्तीर्ण हैं , जबकि वास्तव में उन्होंने कभी भी यह परीक्षा किसी भी मान्यता प्राप्त स्कूल या बोर्ड से पास नहीं की है । यह नुक्ता भी उनका नामांकन पत्र रद्द किये जाने के लिए पर्याप्त आधार है ।

अपने डिक्लेरेशन में मनीष ग्रोवर ने स्पष्ट लिखा है कि उन्होंने 10वीं की परीक्षा 1972 में रोल नंबर 88317 के तहत रोहतक के विश्वकर्मा हाई स्कूल से पास की थी । यह भी कि वे 16/04/1968 से मार्च 1972 तक विश्वकर्मा स्कूल के विद्यार्थी रहे । ग्रोवर ने बताया है कि वे 27/07/1972 से रोहतक के गवर्नमैंट हायर सैकंडरी स्कूल (अब सीनियर सैकंडरी स्कूल) के विद्यार्थी रहे और 10+1 परीक्षा पास की । लेकिन हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड से आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक मनीष ग्रोवर इस परीक्षा में बैठे ही नहीं । इस तरह मनीष ग्रोवर ने इस मामले में भी चुनाव आयोग को गुमराह करते हुए सही जानकारी छिपाने का अपराध किया है जो कि किसी की उम्मीदवारी को रद्द करने का एक बड़ा कारण हो सकता है । शिकायतकर्ता के मुताबिक यह सब उन्होंने मतदाताओं को अपनी शैक्षणिक योग्यता के संबंध मे भ्रमित करने के लिए किया है ताकि लोग उन्हें पढ़ा लिखा समझें ।

निर्वाचन अधिकारी को की गई शिकायत में मनीष ग्रोवर पर एक गंभीर आरोप यह भी है कि उन्होंने अपने ऊपर दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी भी निर्वाचन आयोग से छिपाई है। ग्रोवर ने अपने ऊपर दर्ज एफआईआर नंबर 517 का जिक्र तो नामांकन पत्र में किया है , लेकिन इसी वर्ष 14 मई 2019 को लोकसभा चुनाव के मतदान के समय बूथ कैप्चरिंग के संबंध में रोहतक के थाना शिवाजी कालोनी में दर्ज एफआईआर नं 0293 की जानकारी को जानबूझ कर छिपा लिया । यह रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट 1951 व 1968 की धारा 31 तथा भारतीय दंड संहिता , 1860 की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध है । इतना ही नहीं मनीष ग्रोवर ने अपने नामांकन पत्र के फॉर्म 26 की दूसरी लाइन के पार्ट ए को भी खाली छोड़ा हुआ है जिसे खाली छोड़ना भी नियमानुलार कैंडीडेचर के कैंसीलेशन का एक पुख्ता आधार बनता है ।

अब देखना यह है कि चुनाव आयोग इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करके दांव पर लगी अपनी साख बचाता है या इस मामले पर लीपापोती करके एक बार फिर अपनी बचीखुची इज्जत का भी कचरा करने का काम करता है । फिलहाल गेंद चुनाव आयोग के पाले में है और देखना दिलचस्प होगा कि आयोग आखिर इस मामले में क्या फैसला सुनाता है ? फिलहाल प्रदेश भर के लोगों की निगाहें इस रोमांचक मामले पर टिकी हुई हैं ।

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